Friday, 25 September 2020

क्या जीवन का बहाव झरने की तरह होना चाहिए?

क्या जीवन का बहाव झरने की तरह होना चाहिए?
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अवश्य, जीवन का बहाव झड़ने की तरह ही होना चाहिए। जीवन को झड़ने की उपमा भी दी जाती है। जिस तरह से झरने का पानी अविरल गति से पत्थरों से टकराते हुए पेड़ो और जंगलों में निरंतर प्रवाहित होते रहता है ठीक उसी तरह से हम अपने जीवन में गति, स्फूर्ति और लगन के साथ संघर्षों से टकराते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं।
       जीवन में तरह-तरह के अवरोध उत्पन्न होते रहते हैं। सुख-दुख का मिश्रण हीं जीवन है। अगर हम मुश्किलों से घबराकर या उदास होकर हार मान जाएं तो हमारा जीवन जमे हुए पानी की तरह बदबू दायक हो जाएगा। अविरल धारा की तरह अगर हम बहते रहें तभी हमारा जीवन सार्थक होगा।
      जिस तरह से झरने का पानी ऊंचाइयों से नीचे गिरते हुए भी अविरल धारा में प्रवाहित होता है ठीक उसी तरह से हम संघर्षों से गुजरते हुए अपने जीवन को सुखमय बनाने का प्रयास करते हैं और करते रहना ही चाहिए।
निरंतर गतिमान बने रहना ही सफल जीवन का द्योतक है। प्रकृति प्रदत वस्तुओं से हमें संदेश  मिलता है कि हमें भी जीवन में निरंतर कठिनाइयों को झेलते हुए अग्रसर रहने का प्रयास करना चाहिए।
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                 सुनीता रानी राठौर
                  ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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