Thursday, 17 September 2020

क्या जीवन में परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर है?

क्या जीवन में परिवर्तन ही एकमात्र स्थिर है?
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 परिवर्तन प्रकृति का नियम है, वही एकमात्र स्थिर और शाश्वत है। जीवन परिवर्तनशील है--इस कारण गहरे दुःख को भी सुख की उम्मीद में भूल जाते हैं, इस विश्वास के साथ की जीवन सदा एक सा नहीं रहता।
  समय के साथ कर्मशील जीवन हमें सुखमय बना सकता है। परिवर्तन को स्वीकार कर हम गतिशील बन सकते हैं।
  जीवन का वास्तविक आनंद भी तभी उठा सकते हैं जब हम समय के साथ चलते हुए जड़ रीति-रिवाजों और पुरानी अवधारणा को छोड़कर समय के अनुकूल नवीनता को अपनाते हुए आगे बढ़ें।
   समय के साथ विषय वस्तु और विचार में स्थितियों के अनुसार बदलाव को ही विकास कहा जाता है। 
   ठहरे हुए जल की भांति अपरिवर्तनशील रहे तो सड़न व बदबू निश्चित है यानी रूढ़िवादिता के कारण हमारी प्रगति अवरुद्ध हो जाएगी।
    जीवन में आगे बढ़ने व सुखमय जीवन के खातिर आचार -व्यवहार को परिवर्तनोंन्मुख बनाना होगा। दुनिया के साथ कदम-ताल मिलाकर चलना होगा क्योंकि परिवर्तन शाश्वत है।
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                   सुनीता रानी राठौर
                   ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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