क्या अब डिजिटल की भाषा हो गई है हिन्दी?
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सोशल मीडिया के हर भाग में हिन्दी के विस्तार प्रचार व प्रसार को देखते हुए कहना गलत नहीं होगा कि अब डिजिटल की भाषा हो गई है हिन्दी।
कुछ वर्ष पहले तक की-बोर्ड में हिन्दी टाइपराइटिंग की सुविधा न होने के कारण हिन्दी भाषी अपने विचारों को खुलकर हर विधा में व्यक्त नहीं कर पाते थे। सर्वत्र अंग्रेजी का दबदबा दिखता था पर वर्तमान में हिंदी की सभी विधाओं में फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब चैनल पर हिन्दी भाषा में हर तरह के विषय वस्तु मौजूद है। गूगल द्वारा हिंदी में अपने इच्छानुसार प्रत्येक विषय की जानकारी हम प्राप्त कर लेते हैं।
आज सभी को आगे बढ़ने के लिए हर भाषा के लिए डिजिटल क्रांति एक अवसर बनकर उभरा है। आज हिंदी की की-बोर्ड का ऐप्प विकसित करना व्यवसायिक सफलता बनता जा रहा है। हिंदी में सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए थोड़ा जोर लगाने की जरूरत है। वैश्वीकरण के जमाने में सरकार से प्रोत्साहन की उम्मीद है। हिन्दी में सॉफ्टवेयर बनाने के लिए थोड़े से वित्तीय संसाधन और कुछ हिन्दी प्रेमी तकनीकी युवाओं की जरूरत है और हमारे यहां ऐसे होनहार युवाओं की कमी नहीं है।सभी के सहयोग से हम ऊंचाइयों तक पहुंच सकते हैं और यह कहना गलत नहीं होगा कि अब डिजिटल की भाषा हो गई है हिंदी।
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सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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