Sunday, 17 May 2020

कोरोना ने जीवन और जीविका को कहां पहुंचा दिया है?

जीवन और जीविका में अन्योन्याश्रित संबंध है। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। जीविका है तभी जीवन सुरक्षित है और जीवन सुरक्षित है तभी जीविकोपार्जन संभव है। कोरोना जैसी विकराल महामारी ने जीवन और जीविका दोनों को विकट संकट की स्थिति में डाल दिया है। 
   लॉकडाउन में उद्योग-धंधे बंद होने के कारण लाखों लोगों के बेरोजगार हो जाने से लोगों के जीवन और जीविका खतरे में पड़ गई है। विशेषकर निम्न वर्ग के लोगों की स्थिति ज्यादा दयनीय हो गई है। यही कारण है कि लाखों की संख्या में लोग उल्टी दिशा में गांव की ओर पलायन कर रहे हैं। 
    कोरोना संकट के मुश्किल घड़ी में लोगों का जान बचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है, हालांकि आर्थिक मजबूती भी बेहद जरूरी है। ऐसे में जीवन और जीविका के बीच संतुलन बनाकर हमें कार्यों को अंजाम देने के लिए आगे आना होगा।
    रोजगार छूटने के वजह से जो मजदूर अपने गांव लौटे हैं उन्हें रोजगार से जोड़ने हेतु मनरेगा की योजना को लागू करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मनरेगा के बजट दर बढ़ाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी हो रही है।
  लॉकडाउन की वजह से जीवन और जीविका दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसलिए सरकार अब जीवन को सुरक्षित रखते हुए जीविकोपार्जन हेतु अर्थव्यवस्था के सारे पहलुओं पर धीरे-धीरे काम शुरू करने पर विचार कर रही है। इसमें खेतीबाड़ी से जुड़े कामकाज को छूट देना, फैक्ट्रियों में उत्पादन शुरू करना ,लघु उद्योगों को बढ़ावा देना और सामान का ट्रांसपोर्टेशन शुरू करने जैसे काम शामिल हैं।
  विश्व स्वास्थ्य संगठन(WHO) और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के बीच आजीविका बचाने के लिए जरूरी है कि पहले मानव जीवन को बचाया जाए।
आर्थिक गतिविधियों को शुरू करने के लिए पहले कोविड-19 पर काबू पाना जरूरी है।'
     अतः ऐसी विकट परिस्थिति में हम सभी को समझदारी पूर्वक जीवन और जीविका के बीच सामंजस्य बनाते हुए जीवन को जीना होगा। जीवन सुरक्षित है तो जीविका का भी इंतजाम हम कर सकते हैं।
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                             सुनीता रानी राठौर
                         ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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