Wednesday, 20 May 2020

क्या लॉकडाउन की राहत बढ़ने से बढ़ गई है लापरवाही?


जी हां , इसमें कोई दो राय नहीं कि रुकी हुई जिंदगी और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने हेतु लॉकडाउन 03 और 04 में औद्योगिक क्षेत्रों, वाहनों और बहुत से आवश्यक कार्यों को सुचारु करने के लिए राहत प्रदान की गई पर साथ ही लोगों ने सतर्कता को नजरअंदाज कर लापरवाही भी बरतनी शुरू कर दी है। इसी लापरवाही का खामियाजा है कि हमारे देश में संक्रमितों की संख्या तीव्र गति से बढ़कर एक लाख सात हजार के करीब हो गई है। 3300 लोगों की जानें भी जा चुकी हैं। ऐसी लापरवाही बहुत ही भयावह स्थिति उत्पन्न कर सकती है।
   शराब की दुकान खुलते हीं जो जनता की भीड़ दिखी, वह भयावह थी। प्रवासी श्रमिक ,पर्यटक, छात्र आदि को घर पहुंचाने हेतु जो स्पेशल श्रमिक ट्रेन और बस चलाए जा रहे हैं उसमें रजिस्ट्रेशन हेतु मुंबई, गुड़गांव, सूरत , नोएडा जैसे जगह पर जो जनसमूह उमड़ते हुए दिख रहा है ,शारीरिक दूरियों का बिल्कुल पालन नहीं हो रहा है , वह प्रशासन और जनता दोनों की खामियों को और लापरवाही को उजागर कर रहा है। 
    अधिकांश कोरेटांइन सेंटर की भी हालत बदतर है । एक स्कूल में 100 लोग से अधिक और एक ही रूम में 10, 15 लोग ठहराये जा रहे हैं। शौचालय एक या दो होने की वजह से, खाने की व्यवस्था सही नहीं होने की वजह से लोग आक्रामक तेवर के साथ एकजुट होकर प्रदर्शन कर रहे हैं। दुकानों पर, सब्जी मंडी में या सड़कों पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जा रही है। जिसकी वजह से हालात खराब हो रहा है और इसी लापरवाही का नतीजा है कि संक्रमितों की संख्या तीव्र गति से बढ़ती चली जा रही है। इन सभी स्थितियों के मद्देनजर कह सकते हैं कि लॉक डाउन की राहत बढ़ने से लोगों में लापरवाही भी बढ़ गई है। लोगों की मानसिकता ऐसी हो गई है कि जैसे कोरोना का प्रभाव बिल्कुल खत्म हो चुका है और यही सोच भयावह रूप लेता जा रहा है जो चिंताजनक है।
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                                  सुनीता रानी राठौर
                             ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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