Tuesday, 5 May 2020

शराब के ठेके पर उमड़ी भीड़ से क्या लॉकडाउन खतरे में पड़ गया ?

शराब के ठेके पर उमड़ी भीड़ से क्या लॉकडाउन खतरे में पड़ गया ?
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नि:संदेह शराब के ठेके पर उमड़ी भीड़ से लॉक डाउन खतरे में पड़ गया है।इसके लिए जनता के साथ-साथ सरकार भी पूर्ण रूप से जिम्मेदार है।        जिस देश में संक्रमित लोगों की संख्या 46000 से ऊपर हो चुकी है। लगभग 3000 से ज्यादा लोग जान गवां चुके हैं। मजबूरीवश लॉकडाउन को तीसरे चरण में 2 सप्ताह के लिए बढ़ाना पड़ा , परन्तु जनता की जरूरतों को ध्यान में रखकर कुछ रियायतें देनी पड़ी, जिसमें शराब की दुकानों को
खोलने की भी इजाजत दे दी गई जो आम जनता के लिए बहुत महंगा और डरावना साबित हुआ।       लॉकडाउन और उसमें भी रेड जोन की धज्जियां उड़ाते हुए जिस तरह दुकानों पर भीड़ उमड़ी। जान से प्यारी जाम दिखाई देने लगी। ये स्थिति बहुत ही हास्यास्पद लगने लगी।
 मोदी जी का मंत्र "दो गज दूरी का" और फिजिकल डिस्टेंसिंग को धत्ता बताते हुए जिस तरह लोग एक-दूसरे से चिपक कर खड़े हुए वह बहुत ही चिंतनीय दृश्य बन गया और लॉकडाउन पूर्ण रूप से खतरे में पड़ गया।
      सरकार ने अपने राजस्व को बढ़ाने के लिए शराब की दुकानों को खुलवा कर खुद ही लॉक डाउन की धज्जियां उड़वा दी। शराब की दुकान खोलने की इजाजत देना ही गलत निर्णय था।
    जब फैक्ट्रियां, स्कूल,ट्रेन, बस सब को बंद रखा जा सकता है तो क्या शराब संजीवनी बूटी थी जिसके बिना लोग जिंदा नहीं रह पाते।सरकार को इसे खोलने की इजाजत ही नहीं देनी चाहिए थी। अगर कोविड-19 पर नियंत्रण करना है, अपने देश को सुरक्षित रखना है तो लॉकडाउन का पूर्ण रुप से पालन होना भी जरूरी है नहीं तो लॉकडाउन लगाने का कोई फायदा नहीं बेवजह हमारी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है। 
    इस ज्वलंत प्रश्र व मुद्दे से संबंधित मैं अपनी स्वरचित कविता भी प्रस्तुत कर रही हूॅं-----
        *शराब बनाम कोरोना वैक्सीन*
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दिल्ली में दुकानों पे टूटी भीड़ शराब के लिए
जैसे दौड़ी जनता कोरोना वैक्सीन के लिए।
हर धर्म, जाति,मज़हब सब एकजुट हो गये।
राजस्व बढ़ाने में शराबी सफलीभूत हो गये।

शराबियों का हुजूम देख मैं अचंभित रह गई 
यूं लगा बेरोजगारों में काम की होड़ लग गई।
 इतनी बेचैनी,बेसब्री किसी ने देखी है कहीं ।
 यकीकन दूध,सब्जी,राशन के लिए भी नहीं।

लॉकडाउन,रेड जोन सरेआम धज्जियां उड़ गई
2 गज दूरी तो दूर एक-दूजे से भीड़ चिपक गई।
संजीवनी बूटी शराबियों के लिए शराब बन गई।
नशा कारोबार सरकार की आय- स्रोत बन गई।
--------------+--------------सुनीता रानी राठौर
‌                     ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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