Thursday, 21 May 2020

क्या कोरोना की वजह से लोक कलाकारों का भविष्य अंधेरे में हैं?

हां, मौजूदा परिस्थिति में कोरोना वायरस की वजह से जो लॉकडाउन हुआ उससे लोक कलाकारों का भविष्य कुछ समय के लिए अंधेरे में दिखाई दे रहा है पर हमेशा अंधेरे में रहेगा यह कहना उचित नहीं होगा।
 ग्रामीण स्तर पर मेलों में या शहरों में छोटे-छोटे आयोजनों में जो लोक कलाकार अपने नाट्य अभिनय  या नृत्य संगीत के द्वारा जो आमदनी प्राप्त करते थे फिलहाल वह लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से पूरी तरह से बंद है। 
     राजस्थान के कलाकार जयपुर, जोधपुर जैसलमेर जैसे शहरों में वहां के दर्शनीय स्थलों पर वाद्य यंत्र के द्वारा गीत-संगीत व नृत्य प्रस्तुत करते थे, पर्यटकों के ना आने से उनका रोजगार ठप्प पड़ गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए वहां के मुख्यमंत्री ने 'कलाकार प्रोत्साहन योजना' शुरू की है जिसके माध्यम से कलाकारों द्वारा भेजी गई वीडियो को यूट्यूब पर प्रसारित किया जा रहा है और उन्हें 2500 रुपए की मदद राशि प्रदान की जा रही है। कालबेलिया डांस, कठपुतली कला, बहुरूपिए कला आदि के कलाकारों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हां यह भी सच है कि सारे कलाकार इस स्तर तक पहुंचने में सक्षम नहीं हो पाते।
    मुंबई जैसे महानगरों में भी तमाशा थिएटर जैसे जगहों पर काम करने वाले कलाकार हो या ग्रामीण स्तर पर मेलों में, छोटे स्टेज पर शादी विवाह के आयोजनों में प्रोग्राम देने वाले कलाकार हों फिलहाल सभी का वर्तमान व भविष्य कोरोना की वजह से प्रभावित हुआ है।उनकी आमदनी का स्रोत बंद हो चुका है पर हमारे देश के लोक कलाकार अपने अभिनय का ऐसे समय में सदुपयोग भी कर रहे हैं।
      झारखंड सरकार 'लोक कल्याण संस्थान' के द्वारा अधिकांश लोक कलाकारों को अपने अभिनय से कोरोना से बचाव संबंधी जागरूकता फैलाने के कार्य में लगाये हुए है। वे अपनी प्रांतीय भाषा में गीत- संगीत गाकर, नुक्कड़ नाटक, कठपुतलियों आदि के कार्यक्रम कर जन संदेश दे रहे हैं जो बहुत ही चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो बनाकर  यूट्यूब , फेसबुक के जरिए लोग अपनी कला का प्रचार करने में भी लगे हुए हैं। सरकार भी बढ़ावा दे रही है।
     इन सभी कलाकारों को देखते हुए कह सकते हैं कि जिसमें हुनर है वह भूखा नहीं मर सकता है। भले ही कुछ समय के लिए विकट स्थिति आई है। आमदनी का स्रोत बंद है पर भविष्य अंधेरे में है यह कहना ठीक नहीं । उम्मीद हीं जिंदगी है।
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                            सुनीता रानी राठौर
                            ग्रेटर नोएडा(उत्तर प्रदेश)

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