लॉकडाउन में स्थानीय रोजगार खत्म होने के कगार पर है इतनी नाउम्मीदी भी नहीं होनी चाहिए।पर हां, यह निर्विवाद सत्य है कि लॉकडाउन के वजह से रोजगार पर संकट की स्थिति उत्पन्न हो गए हैं। आवागमन और आयात निर्यात बंद होने के कारण सामानों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसी परिस्थिति में स्थानीय रोजगार पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
* किसान के फसल की खरीद बिक्री बंद है सब्जी , फल जैसे खराब होने वाले फसल को उचित बाजार उपलब्ध नहीं हो पा रहा जिसके कारण किसान को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ऑरेंज और ग्रीन जोन में फसलों की बिक्री को छूट देने का प्रावधान किया है ताकि उत्पादनकर्ता पर मंदी का दोहरी मार ना पड़े।
*दूध का रोजगार करने वाले जिनका दूध दूर-दूर शहरों और होटलों में जाता था आज लॉकडाउन के वजह से दूध बर्बाद हो रहा है।
*स्थानीय रोजगार में परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए लॉकडाउन में मास्क बनाने का कार्य भी तीव्र गति से चल रहा था पर अब कपड़े की कमी और अनुपलब्धता के कारण मास्क बनाने की गति भी धीमी होने लगी है।
* लॉकडाउन के कारण तालाबों की सफाई ना होने के कारण मछली पालन व्यवसाय पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
* पश्चिम बंगाल का जूट कारखाना बंद होने से कई लाख श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं।
*स्थानीय रोजगार में चीनी मिल और चावल मिल भी प्रभावित हुआ है। अधिकांश जगह गन्ना उत्पादन की कमी के कारण चीनी मिल बंद हो चुकी है और उस में कार्यरत श्रमिक बेरोजगार हो चुके हैं।
*चौरसिया वर्ग जो पान की खेती कर हर चौराहे पर पान की छोटी दुकान खोल अपना व्यवसाय करते थे।पान के पत्तों की अनुपलब्धता के कारण उनका व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है।
* ग्रामीण स्तर के लोग जो चटाई, झाड़ू , मिट्टी के गमले , मिट्टी के घड़े आदि बनाकर स्थानीय स्तर पर बेचकर जो जीवन यापन कर रहे थे उनकी आमदनी का स्रोत बंद हो गया है।
* फूलों की खेती कर जो दूर- दूर शहरों में देश-विदेश फूलों का व्यापार करते थे ।आज उनकी बिक्री नहीं हो पा रही और फूलों को ज्यादा दिन संभाल कर भी नहीं रख सकते। इस कारण लागत दाम भी उनका डूबने लगा है।
* इस तरह वर्तमान परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए हम कह सकते हैं कि लॉकडाउन से स्थानीय रोजगार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं पर खत्म होने के कगार पर है ऐसी नाउम्मीदी मन में नहीं रखनी चाहिए।पर हां निसंदेह बुरी तरह प्रभावित हुआ है । इसी कारण सरकार सभी का ध्यान रखते हुए रेड जोन को छोड़कर ऑरेंज और ग्रीन जोन में सावधानियां बरतते हुए फिजिकल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए स्थानीय रोजगारों को करने की छूट प्रदान की गई है । जैसे --सैलून को छोड़कर कूलर मरम्मत ,बिजली रिपेयरिंग, स्टेशनरी की दुकान सब्जी, फल किराना आदि दुकानों को खोलने की छूट दी गई है जो अनिवार्य भी है और जनता और देश हित में भी है।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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