Sunday, 3 May 2020

लॉकडाउन में लोगों के जीवन स्तर में गिरावट

लॉकडाउन में लोगों के जीवन स्तर में गिरावट
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  लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था पूर्ण रूप से चरमरा चुकी है। नि:संदेह आर्थिक तबाही का मंजर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे रहा है। फैक्ट्रियां कल- कारखाने बंद होने की वजह से लाखों -लाख लोग बेरोजगार हो गए ,भुखमरी के कगार पर खड़े हो गए , दाने-दाने को मोहताज हो गए ,दूसरों के समक्ष हाथ फैलाने को मजबूर हो गए।
    लॉकडाउन की अवधि काल 7 सप्ताह से बढ़कर 9 सप्ताह हो गई और आगे भी खत्म होने की उम्मीद नहीं दिखाई देती। ऐसी कठिन विषम परिस्थिति में गरीबों का तो बुरा हाल है हीं, बड़े-बड़े उद्योगपति भी प्रभावित हो रहे हैं। लंबी अवधि तक कल कारखाने बंद होने की वजह से मशीनों पर बुरा असर पड़ रहा है साथ ही कच्चे माल खराब हो रहे हैं। दूसरे देशों से माल आयात करने में भी परेशानी हो रही है। बचे माल से सामान तैयार भी करा लें तो तैयार माल निर्यात करने में परेशानी आ रही है।
दूर दराज गांव में भी आवश्यक सामग्री की आपूर्ति नहीं हो पा रही । लोग खुद को बेबस और लाचार महसूस कर रहे हैं।
      25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन होने के बाद से फैक्ट्रियां बंद है। केंद्र सरकार की जीएसटी में 15 फ़ीसदी हिस्सा वाहन उद्योग का है। विक्री शून्य रहने के कारण वाहन कंपनियों को करीब एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ। सरकार को भी बड़ा राजस्व नुकसान हुआ है। 
   अगर सरकार घाटे में रहेगी तो वो कर्मचारियों के वेतन व महंगाई भत्ते में भी कटौती करेगी।
 * केंद्रीय कर्मचारियों का जून 2021 तक DA में कटौती कर दी गई है। 
   लॉकडाउन की वजह से सरकारी नौकरी पेशा हो या प्राइवेट सभी के आमदनी पर बुरा असर पड़ रहा है और आगे भी पड़ेगा ।
   बेरोजगारी दर एक माह में तेजी से बढ़ी है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2020 में बेरोजगारी दर 14. 8% से बढ़कर 23.5 % पर पहुंच गई है।
    लॉक डाउन की वजह से बेरोजगारी बढ़ी और बेरोजगारी की वजह से लोगों के जीवन स्तर में गिरावट आने लगी है। भविष्य की चिंता से मानसिक रूप से विक्षिप्त हो कितनों ने आत्महत्या कर ली। अगर हालात नहीं संभले और लोगों को रोजगार नहीं मिला तब और अधिक खतरे की घंटी बज सकती है । युवा वर्ग आक्रोश और कुंठा में गलत राह भी पकड़ सकते हैं। जॉब ना मिलने की चिंता में युवा मानसिक तनाव में जा सकते हैं। गरीब व्यक्ति हर तरह के छोटे बड़े कार्य कर जीवन यापन कर लेता है पर मध्यम वर्गीय परिवार के बच्चे अपने आपको निम्न स्तर के कार्य में एडजस्ट नहीं कर पाते हैं। इस कारण जॉब छूट जाने पर वह ज्यादा तनाव ग्रसित हो जाते हैं ।
    सामाजिक स्तर पर हर व्यक्ति के जीवन स्तर में सुधार हो, आर्थिक मजबूती हो, इसके लिए सरकार को जल्द से जल्द इस बीमारी पर नियंत्रण करते हुए लॉक डाउन को खत्म करने का प्रयास करनी चाहिए। देश हित में अर्थव्यवस्था का मजबूत होना बहुत जरूरी है ताकि लोगों का जीवन स्तर के ग्राफ में उछाल देखने को मिले। 
                               सुनीता रानी राठौड़
                                ग्रेटर नोएडा( उत्तर प्रदेश)

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