Sunday, 24 May 2020

क्या कोरोना वायरस ने लॉकडाउन में लेखन को दिया नया आयाम ?

चुनौती भरी परिस्थितियां नये-नये राह भी दिखाती है। यही वास्तविकता लॉकडाउन में लेखन क्षेत्र में भी देखने को मिला है। इतनी लंबी अवधि में घर बैठे बहुत से लोगों ने अपने समय का सदुपयोग करते हुए अपनी लेखन-कला को उभारा है। 
   लेखकों की बहुत बड़ी तादाद नेट राजपथ पर अपना शौक पूर्ण करने में लगा है। तालाबंदी के उबाऊ समय में तमाम बड़े-बड़े प्रकाशक भी नेट की मदद से नए रचनाकारों को उभरने का अवसर  प्रदान कर रहे हैं। समालोचक नामवर जी की तरह दूसरे की रचनाओं को पढ़कर लोग समीक्षात्मक टिप्पणी भी लिखित रूप में देने लगे हैं।
   आज छोटे-बड़े हर तरह का रचनाकार नेट पर अपना ब्लॉग बनाकर या साहित्यिक पत्रिकाओं के ई-संस्करणों से जुड़ता जा रहा है। आज इंटरनेट सारी दुनिया में अभिव्यक्ति की आजादी का व्यापक मंच बनकर लेखन को नया आयाम प्रदान कर रहा है।
   लेखक कल्पना और यथार्थ दोनों में जीता है।  विचारों को शब्दों में पिरोता है। अपने विचारों को प्रस्तुत करने का इससे बेहतर समय नहीं मिल सकता। लेखन के लिए डिजिटल गैजेट्स का भी सहारा मिल रहा है। 
  लेखन कला द्वारा लेखक का सामाजिक और बौद्धिक ज्ञान का भी विस्तार हो रहा है। लॉकडाउन में प्रेरणादायक रचना पढ़ कर लिखने के लिए भी वे प्रेरित हो रहे हैं।
   इस तरह नि:संदेह कह सकते हैं कि लॉकडाउन में लेखन को नया आयाम मिला है। सकारात्मक ऊर्जा से अभिभूत हो कर लोग रचनात्मक कार्य में लगे हुए हैं। कुछ कविताएं लिख रहे हैं , कुछ कहानियां, कुछ समयानुसार अपने आलेख द्वारा अपना विचार प्रस्तुत कर रहे हैं।
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                           सुनीता रानी राठौर 
                         ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश

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