क्या भविष्य में कोरोना वायरस के साथ जीना होगा ?
कोरोना वायरस का तीव्र गति से फैलना और उसकी कोई उचित दवा और वैक्सीन का मौजूद ना होना हमें संकेत दे रहा है कि खुद को कोरोना वायरस के साथ जीने के लिए मानसिक रूप से तैयार करना होगा। यह बीमारी जल्द खत्म होने वाली नहीं है ।सावधानियां और एहतियात बरतते हुए फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते रहें।हाथों को साबुन से धोते रहें। किसी संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें। कोरोना वायरस के उचित लक्षण दिखे तो तुरंत हेल्थ स्क्रीनिंग कराएं और एहतियात बरतते हुए बीमारी से बाहर निकलने का अथक प्रयास करें। जिस तरह चिकन पॉक्स जैसी फैलने वाली बीमारी से सावधानियां बरतते हैं उसी तरह बिना घबराए इससे भी हम खुद को बचा सकते हैं।
हमारे देश में पिछले कुछ दिनों से प्रतिदिन करीब 3000 मामले सामने आ रहे हैं। जिसके कारण स्वास्थ्य मंत्रालय का भी मानना है कि भविष्य में कोरोना के साथ जीना होगा।
दुख के साथ खुशी की बात यह भी है कि 216 जिलों में कोई पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है।भारत में फिलहाल संक्रमितों की संख्या लगभग 59,662 हो चुकी है,करीब 19000 लोग जान भी गंवा चुके हैं पर सुखद बात यह है कि 1,273 लोग ठीक भी हो चुके हैं।
स्वास्थ्य मंत्रालय के निदेशक लव अग्रवाल और दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया के अनुसार जून-जुलाई में कोरोना वायरस के मामले अपने चरम पर पहुंच सकते हैं।यह लड़ाई मुश्किल है। इससे निपटने के लिए आपसी सहयोग की जरूरत है।
अतः हम आम जनता का फर्ज बनता है कि सरकार द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए खुद को सुरक्षित रखें । अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय दें।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा
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