जिस कार्य को सबसे अधिक प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी वह क्षेत्र शिक्षा का ही है। नई शिक्षा नीति में मात्रृभाषा को प्राथमिकता दी गई है यह सही दिशा में उठा एक बड़ा कदम है।
नई शिक्षा नीति में बच्चों पर दबाव कम करने व उनके हुनर को देख उसे बढ़ाने का जो लक्ष्य रखा गया है वह बहुत लाभकारी सिद्ध होगा। मात्र डिग्री लेने से व्यक्ति कलर्क या सहायक तक ही सीमित रहता है लेकिन जब उसे मनचाही शिक्षा मिलती है तो उसके व्यक्तित्व का विकास पूर्णता के साथ होता है।
नई शिक्षा नीति के अंतर्गत उच्च शिक्षा में मल्टीपल एंट्री एंड एक्जिट होगा यानी मान लें आप बीटेक में एडमिशन लिए, 2 सेमेस्टर बाद उस में रुचि खत्म हो गई पढ़ाई करने की, तब वो साल खराब नहीं होगा। एक साल के आधार पर सर्टिफिकेट मिलेगा और 2 साल पढ़ने पर डिप्लोमा कोर्स। पूरा पढ़ाई करने पर डिग्री मिलेगी। इस तरह की व्यवस्था होगी। कहीं नई जगह एडमिशन लेने के लिए रिकॉर्ड कंसीडर किया जाएगा। इसे सरकार की पॉलिसी में क्रेडिट ट्रांसफर कहा गया है। आपने कोर्स पूरा नहीं किया लेकिन जितना किया उसका क्रेडिट आपको मिल जाएगा। इससे उन सभी विद्यार्थियों को फायदा मिलेगा जो परिस्थितिवश बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं या उस विषय को न समझ पाने के कारण बीच में अपना सब्जेक्ट बदलना चाहते हैं।
देश भर की हर यूनिवर्सिटी के लिए शिक्षा के मानक एक समान होंगे। इसी तरह से महत्वपूर्ण बिंदुओं पर तरह-तरह के जो बदलाव किए गए हैं वह अभी सही महसूस हो रहे हैं।
नई शिक्षा नीति बुनियादी समस्याओं को दूर कर विद्यार्थी को दबाव मुक्त कर व्यक्तिगत विकास में सहायक बनने का प्रयास है। शिक्षा में लचीलापन और व्यावहारिकता होना छात्रों के लिए हितकर साबित होगा। पूर्ण विश्वास है कि नई शिक्षा नीति बुनियादी समस्याओं को दूर करने में सक्षम साबित होगी।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
No comments:
Post a Comment