संस्मरण
मन की टीस
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यह घटना कुछ वर्ष पहले उस समय की है जब मैं विद्यालय में कक्षाध्यापिका के रूप में परिणाम पत्र बना रही थी। आये दिन विद्यालय में अध्यापकों द्वारा छात्र छात्राओं के साथ पक्षपात पूर्ण रवैया के समाचार सुनने को मिलते हैं। मैं भी इस स्थिति से गुजरी हूं। मैंने भी झेला है।
मेरी प्रतिभावान छात्रा जो प्रथम स्थान की हकदार थी, उसे गणित और विज्ञान के अध्यापकों के मिलीभगत द्वारा जानबूझकर Oral Test में कम नंबर देकर तीसरे स्थान पर पहुंचाया गया और तीसरे स्थान की छात्रा को प्रथम स्थान पर। क्यों? क्योंकि वो बच्ची उनसे ट्यूशन नहीं पढ़ती थी।
मैं पूरी हकीकत जानते हुए भी आवाज बुलंद नहीं कर पाई क्योंकि वे दोनों अध्यापक प्रधानाध्यापक के विश्वासपात्र थे और उन्हीं के क्षेत्र के रहने वाले थे।
मैं दूसरे राज्य से blong करती थी। कुछ सालों के लिए पतिदेव के साथ स्थानांतरण होने पर उस शहर में गयी थी। मेरी बातों पर कोई विश्वास नहीं करेगा यह सोच कर मैं चुप रह गई। उसी दौरान साजिश के तहत मेरे जरूरी पेपर गायब कर मुझे प्रधानाध्यापक के नज़र में भी हल्का कर दिया गया था। इस वजह से भी अप्सेट होने के वजह से मैं आवाज बुलंद नहीं कर पायी।
उस बच्ची के साथ हुए अन्याय का दोषी मानकर मैं खुद को अपराध मुक्त नहीं कर पायी और आज भी वो टीस मेरे मन को सालते रहता है।
मैं चाहूंगी कि ओरल टेस्ट के पक्षपात पूर्ण रवैया से बचाने के लिए हर जगह रिकॉर्डिंग की व्यवस्था हो ताकि अध्यापक अपनी मनमानी न कर सके।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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