Saturday, 11 July 2020

क्या राजनैतिक संरक्षण का परिणाम है विकास दुबे?

  गैंगस्टर विकास दुबे राजनैतिक गंदगी की उपज है।सियासत, अपराध और पुलिस गठजोड़ का नमूना है विकास दुबे जैसे लोग जो जुर्म का बादशाह बन खून-खराबा कर दहशत फैलाते हैं। 
   8 पुलिस वालों की मौत हुई तो पुलिस और प्रशासन जाग उठी। आम आदमी मरता तो अभी वह छुपा बैठा रहता क्योंकि उसके सिर पर सभी पार्टियों के नेताओं का हाथ था। उसके एनकाउंटर से नेताओं और बड़े अधिकारियों के नाम उजागर होने से रह गए।
एक पर चढ़ा कफन और सौ का राज दफन। 
 गैंगस्टर विकास दुबे पर 60 से ज्यादा हत्या, रंगदारी जैसे संगीन धाराओं के मामले दर्ज हैं लेकिन राजनैतिक संरक्षण की वजह से कोई सख्त एक्शन नहीं लिया गया। हिस्ट्रीशीटर अपराधी जिसने 2001 में राज्य मंत्री संतोष कुमार शुक्ला को जेल में पुलिस के सामने मारा, कालेज प्रबंधक से लेकर कितने नामी लोगों की हत्या की और उसके खिलाफ गवाही देने या मुकदमा दर्ज कराने की हिम्मत लोग नहीं कर पाए। वो खूंखार बनता गया आखिर क्यों ? क्योंकि राजनेताओं ने उसे पनाह दे रखी थी। 
      कोई भी अपराधी कितना भी खूंखार क्यों ना हो पर पुलिस पर गोली चलाने की हिमाकत नहीं कर सकता जब तक कि उसे राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त ना हो।
    जब थानाध्यक्ष विनय तिवारी जैसे लोग अपराधियों के मुखबिर बन जाए, राजनेता संरक्षण दे तो समाज में ऐसे कुख्यात अपराधियों को फलने-फूलने में समय नहीं लगता। असली अपराधी विकास दूबे के साथ- साथ देश के वे राजनेता और अधिकारीगण भी हैं जो ऐसे अपराधियों को संरक्षण देकर गुनाह को दबाने में साथ देते हैं। इन्हें भी फांसी की सजा मिलनी चाहिए।
                        सुनीता रानी राठौर
                            ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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