आधुनिक तकनीक से लैस नया संसद भवन क्यों नहीं होना चाहिए , अवश्य होना चाहिए बशर्तें सरकार के पास सरप्लस पैसे हों। आज की स्थिति ऐसी है कि सरकार के पास अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए फंड नहीं है। केंद्रीय कर्मचारियों के 1 साल के D.A.काट दिए गए।
आंख बंद करने से हकीकत छुप नहीं जाती। यह सर्वविदित है कि हमारे देश के दूरदराज गांवों की स्थिति कैसी है? वहां के बदहाल स्थिति का समाचार मीडिया वाले कितना दिखाते हैं, सभी बुद्धिजिवियों को पता है।
जनता के टैक्स का पैसा राजनेता कहां इस्तेमाल करें यह उनके ऊपर निर्भर करता है। सरकार आते- जाते रहती है। गरीबों की स्थिति यथावत बनी रहती है। सरकार का प्रथम कर्तव्य है कि जनता के मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने और गांव को भी खुशहाल बनाने का प्रयास करे।
वर्तमान में अस्पतालों की जो स्थिति है और विशेषकर गांव में जितनी कमी अस्पतालों की है ,आज के समय में त्वरित गति से किस ओर काम करने की आवश्यकता है एक अच्छी सरकार भली-भांति समझ सकती है।
यदि आप कर्तव्यनिष्ठ सरकार हैं और अपने फर्ज को ईमानदारी से पूर्ण करना चाहते हैं तो सर्वप्रथम मूलभूत जरूरतों पर ध्यान देकर पैसों का सही समय पर सही इस्तेमाल करें न कि आधुनिक तकनीक से लैस नया संसद भवन बनाने पर। जनता की आंख के तारे बनें न कि आंख की किरकिरी। आम नागरिक की सरकार से यही अपेक्षा रहती है।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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