चीन का सस्ता और घटिया माल इस कहावत को चरितार्थ करता है --'सस्ता रोए बार-बार मंहगा रोए एक बार'।
आम जनता जानती है कि चाइनीज माल टिकाऊ नहीं होते, पर कुछ आर्थिक मजबूरी की वजह से कुछ नए-नए डिजाइन में चीजें उपलब्ध होने की वजह से खुद को आकर्षित होने से रोक नहीं पाते।
पर वह हमारे लिए महंगा साबित होता है क्योंकि तुरंत खराब हो जाता है, खराब होने के बाद उसकी रिपेयरिंग भी नहीं हो पाती और हमें मजबूरन यूं ही उसे फेंक कर दूसरा खरीदना पड़ता है।
कारोबारी भी सस्ते माल से होने वाले मुनाफे के कारण चीन की ओर आकर्षित होते गए और उसका दुष्परिणाम हुआ घरेलू उत्पादन उद्योग का धीरे-धीरे खत्म होना, रोजगार भी खत्म होना।
आज हमारा बाजार मेड-इन-चाइना के सामान से पटा पड़ा है। भगवान की मूर्ति से लेकर खिलौने तक, कपड़े से लेकर कंप्यूटर तक, गैर पारंपरिक ऊर्जा क्षेत्र सभी पर उसका एकछत्र राज है।
भारत जो सामान बनाता था, चीन, भारत में वही सामान सस्ते दाम में बेच रहा है। चीन पर भारत की निर्भरता दवा बनाने को लेकर भी है। जेनेरिक दवाएं बनाने और उसके निर्यात में भारत बहुत आगे है पर इसके कच्चे माल के लिए 90 फीसद भारत चीन के भरोसे है। 70 फ़ीसदी मोबाइल फोन के लिए भारत की निर्भरता चीन पर है। कॉस्मेटिक के कई ऐसे उत्पाद जो पूरी तरह चीन के कच्चे माल पर निर्भर है।
निर्यातकों के अनुसार चीन से सस्ते दाम पर कच्चे माल मिलने की वजह से उनकी लागत कम होती है और वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मुकाबला करने में सक्षम होते हैं।
आज की परिस्थिति में भारत को खुद को सक्षम साबित करने का एक अवसर मिला है। यहां चीन जितना बड़ा बाजार है। कई गुना मैन पावर है और लोगों को रोजगार की भी सख्त जरूरत है। छोटे उद्योग संजीवनी साबित होते हैं। सरकार इसे बढ़ावा देकर अच्छी गुणवत्ता का सामान तैयार करा सकती है। सरकार को टैक्स भी मिलेगा और चीन पर निर्भरता भी कम होगी। सरकार को भारतीय फार्मा उद्योग और विविध उद्यमियों के साथ मिलकर लंबी योजना बनाने की जरूरत है।
चीन से आने वाले उत्पादों पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए और देश के कच्चे माल पर टैक्स कम किया जाए ताकि यहां के उद्योग धंधों का विस्तार और विकास तीव्र गति से हो सके और आम जनता को अच्छी गुणवत्ता वाली समान कम दाम में मिल सके ताकि उनका झुकाव घटिया चाइनीज सामान से दूर हो सके। भारतीय अपने देश में निर्मित सामानों को खरीदने की ओर अग्रसर हो। इससे हमारा देश भी आर्थिक रूप से मजबूत और सक्षम होगा।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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