Tuesday, 21 July 2020

क्या वामदल भारतीय संस्कृति के विरोधी हैं?

हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश है जहां हर धर्म, हर विचार, हर दल के लोग अपना स्वतंत्र विचार रखने के हकदार हैं। मेरा मानना है कि सभी दल में कुछ सामाजिक हित और संस्कृति से जुड़े रखने के बहुमूल्य विचार समाहित होते हैं।
  हमें अपने विरोधियों से भी कुछ अच्छे विचार हासिल हो जाते हैं यही हमारी संस्कृति सिखाती है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम जी ने रावण के मरने के पहले लक्ष्मण जी को उनके पास ज्ञान अर्जित करने हेतु भेजा था। हम भी श्रीराम के अनुयायी हैं।
   जहां तक मैं वामदल के विचारों के बारे में जान सकी हूं वे सामाजिक समानता, मानवता, धर्म निरपेक्षता आदि की बात करते हैं। वे परिवर्तन में विश्वास रखते हुए सर्वहारा समाज, साम्यवादी राज्य की स्थापना चाहते हैं। वे दक्षिणपंथी विचारधारा के विरोधी हैं। उनके अनुसार पूंजीपतियों और मेहनतकश वर्ग का समान हक हो, श्रम की संस्कृति सर्वश्रेष्ठ हो, वर्ग विहीन समाज हो। पूंजीपति वर्ग इनके विचारों से सहमत न होने के कारण इनको अपना विरोधी मानता है।
   आज हमारी संस्कृति पर कोई उंगली उठाता है तो हमें भी अपनी खामियों पर ध्यान देकर उसे दूर करने की आवश्यकता है।
  हमारे विचार से वामदल भारतीय संस्कृति के विरोधी नहीं हैं। जिस तरह प्रभु राम सर्वहारा वर्ग को साथ लेकर युद्ध में विजय प्राप्त किए उसी तरह हमें जन-जन को सम्मान और प्रतिष्ठा देते हुए सबको साथ लेते हुए अपनी संस्कृति को ऊंचाई पर पहुंचाना है। हमारी भारतीय संस्कृति प्राचीन और महान है। सभी को समेट कर समय के साथ अमूल-चूल परिवर्तन के साथ खुद को विश्व पटल पर महान साबित करना है।
                       सुनीता रानी राठौर 
                       ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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