Tuesday, 28 July 2020

क्या रामलला जन्मभूमि के पूजन पर राजनीति होनी चाहिए?

      मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम हमारे आदर्श हैं। हमें उनके विचारों का अनुकरण कर अपने जीवन को सफल बनाना है। रामलला जन्मभूमि के पूजन पर राजनीति कतई नहीं होनी चाहिए। ये जन-जन की वर्षों की चाहत और तपस्या की पूर्णता का समय है। इस दिन को ऐतिहासिक बनाने के लिए जोर-शोर से तैयारियां चल रही है।
    मुख्य मुख्य वीआईपी लोग आमंत्रित किए गए हैं। हमारे प्रधानमंत्री जी मुख्य अतिथि होंगे। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से लेकर बिहार के मुख्यमंत्री जी का भी नाम है। वर्तमान में बिहार में कोरोना से जो विकट स्थिति पैदा हुई है और बाढ़ से कई जिलों में जो तबाही और त्राहि-त्राहि मची हुई है ---उस हालात का निरीक्षण करने, उससे निपटने के लिए उचित संसाधन का इंतजाम करने और लोगों को ढाढस बंधाने के लिए माननीय नीतीश कुमार जी जनता के बीच कहीं नहीं दिख रहे हैं-- ऐसे में क्या बिहार की जनता अयोध्या पहुंचने पर उनके खिलाफ कुछ नहीं बोलेगी-- अवश्य बोलेगी क्योंकि शीर्षस्थ पद पर बैठे शासक से जनता को उम्मीद रहती है कि ज्वलंत मुद्दे विशेष कर जहां जान-माल की हानि हो रही हो उस पर तत्परता से कार्य करें। जनता को राहत भी पहुंचाएं। अगर आप उस पर ध्यान न दे कर सिर्फ आस्था की पूर्णता पर ध्यान देंगें तब जनता के साथ-साथ विपक्षी दल वाले भी उंगली उठाएंगे ये स्वाभाविक है पर इसे राजनीति का नाम देना उचित नहीं।
                       सुनीता रानी राठौर 
                    ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

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