चीन ने पूरी दुनिया में कोरोनावायरस फैलाकर सभी देशों के अर्थव्यवस्था का भट्ठा बैठा दिया है और खुद अपनी दुनियादारी चमका रहा है और विस्तारवादी नीति भी अपना रहा है।
तिब्बत की राजधानी ल्हासा को चीन ने कब्जा कर रखा है। चीन के कब्जे के बाद से काफी संख्या में तिब्बती लोग और वहां के धर्मगुरु दलाई लामा भी भारत में शरण लिए हुए हैं। दुनिया में जहां भी तिब्बत के लोग शरण लिए हुए हैं, तिब्बत की आजादी की मांग बुलंद करते रहते हैं।
शांतिप्रिय राष्ट्र तिब्बत पर जबरदस्ती कब्जे का मामला संयुक्त राष्ट्र में भी नहीं उठ सका परंतु कुछ दिनों पहले अमेरिका ने तिब्बत को अलग देश का दर्जा देने की मांग उठाई है और कहा है कि चीन तिब्बती बौद्ध धर्म गुरु पंचेन लामा को रिहा करे। चीन की रणनीति को काटने के लिए अमेरिका ताइवान, हांगकांग और तिब्बत को लेकर दखल देना शुरू कर दिया है।
तिब्बत को जॉन ऑफ पीस बनाना होगा। दोनों सीमाएं आर्मी फ्री होनी चाहिए। तभी शांति होगी।भारत और चीन के बीच तिब्बत है और जब तक तिब्बत का मुद्दा हल नहीं होता तब तक तनाव की स्थिति बनी रहेगी।
इस वक्त दुनिया के चक्रव्यूह में चीन फंसा हुआ है। शक्तिशाली देशों के साथ मिलकर तिब्बत को आजादी भी दिलवा सकते हैं और चीन को कमजोर कर उसके विस्तारवादी नीति को ध्वस्त भी कर सकते हैं। चीन के चालों का जवाब भी होगा तिब्बत की आजादी।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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