Wednesday, 22 July 2020

क्या अपराधियों की जाति पर राजनीति होनी चाहिए?

अपराध की कोई जाति नहीं होती। राजनीति का अपराधीकरण और अपराध का राजनीतिकरण से आज जनता त्रस्त है। राजनीति की भी एक सीमा  होती है। हर बात पर जाति के नाम पर बवाल ठीक नहीं। अपराधी किसी भी जाति का हो अपराधी ही होता है और उसे उसके अपराध की कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
 एक राजनीतिशास्त्र ज्ञाता के अनुसार राजनीति शास्त्र अपराध शास्त्र की एक शाखा है। आज जाति के नाम पर अपराध में लिप्त लोग भी राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते हुए संसद भवन में बैठ रहें हैं और अपराधियों को अपने फायदे के लिए संरक्षण दे रहे हैं। जो ऊंचे पद पर बैठकर अपराधियों का साथ दे रहे हैं वह अपराधियों से कई गुना ज्यादा अपराध कर रहे हैं। उन्हें आम अपराधी से दुगुनी सजा मिलनी चाहिए।
   आज ऊंचे आदर्शों के कमल कुम्हलाने लगे हैं। जाति के नाम पर बुद्धिजीवी भी अपराधियों का समर्थन करते नजर आ रहे हैं जो कि सरासर गलत है। लोकतांत्रिक प्रणाली को बनाए रखने के लिए निरपेक्ष भाव से जाति और पद को नजरअंदाज कर न्यायिक प्रक्रिया को बहाल करने की जरूरत है। पुलिस की कार्यप्रणाली में भी बहुत सुधार और बुनियादी परिवर्तन की मांग है। 
   संदेहास्पद एनकाउंटर मन में शंका का सौ बीज बोता है। जाति को नजरंदाज कर अपराधी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए पर न्यायिक प्रक्रिया के तहत। कोई भी अपने अधिकार का दुरुपयोग करते हुए सजा देने का अधिकारी नहीं है। अपराधी के अपराध में साथ देने वाले राजनेता भी उतने ही गुनाहगार हैं जितना कि उस अपराधी का सहयोगी। अदालत को सख्त कदम उठाते हुए न्यायिक प्रक्रिया के तहत उन्हें भी सजा सुनाने की जरूरत है ताकि आइंदा कोई ऐसी गुस्ताखी न करें जाति के नाम पर भी राजनीति न करें। ऐसा उदाहरण प्रस्तुत करने की जरूरत है जो समाज में एक अच्छा सकारात्मक संदेश दे।
                    सुनीता रानी राठौर
                   ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)

No comments:

Post a Comment