भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है और यह सम्मान असाधारण राष्ट्रीय सेवा के लिए प्रदान किया जाता है। इन सेवाओं में कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल शामिल है।
बौद्ध धर्म गुरु दलाई लामा हिमाचल के धर्मशाला के तवांग मठ में बीते कई दशकों से रह रहे हैं और यहां से ही तिब्बत की निर्वासित सरकार चलती है। भारत सरकार ने उन्हें राजनीतिक संरक्षण दे रखा है।
शांति के अग्रदूत दलाई लामा पिछले छह दशकों से तिब्बत की आजादी और वहां मानवाधिकारों की बहाली के लिए निरंतर शांतिपूर्वक और अहिंसात्मक रूप से संघर्ष कर रहे हैं। तिब्बतियों के और दलाई लामा के सहयोग से चीन पर भारत सरकार भी दबाव डाल सकती है और शांतिपूर्ण तरीके से तिब्बत को आज़ादी दिलवाने के साथ-साथ अपना भी मामला सुलझा सकती है।
महामहिम धर्मगुरु दलाई लामा को शांतिपूर्ण प्रयासों के लिए विश्व का सर्वोच्च सम्मान नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया है। दलाई लामा शांति दूत के रूप में कार्य कर रहे हैं पर भारत के लिए कोई खास विशेष योगदान नहीं है। परंतु दो गैर भारतीय नागरिक अब्दुल गफ्फार खान और नेल्सन मंडेला को सराहनीय कार्य हेतु भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। उसी आधार पर धर्मगुरु दलाई लामा भी विश्व शांति दूत के रूप में अहिंसावादी मार्ग पर चलकर जो सराहनीय कार्य कर रहे हैं उसके लिए अगर उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाता है तो कोई अनुचित कदम नहीं होगा।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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