सारे अधिकार सांसद व विधायक के पास ही हैं नाम के लिए वोट का अधिकार आम जनता के पास है। पर इस अधिकार का भी क्या फायदा? जिस तरह सांसद, विधायक दल-बदलू रवैया अपनाकर जनता को मूर्ख बना रहे हैं इससे तो लगता है कि चुनाव प्रक्रिया ही बंद हो जानी चाहिए। बेवजह अमूल्य समय और धन की बर्बादी चुनाव के नाम पर होती है।
तीन चौथाई समय तो सरकार गिराने और सरकार बनाने में ही बर्बाद करते हैं। जनता की फिक्र कब करेंगे ?
जब देश महामारी से त्रस्त है। लगभग 13 लाख लोग मौत से लड़ रहे हैं। करीब 31000 लोग मौत के मुंह में समा गए। दो राज्य महामारी के साथ-साथ बाढ़ से त्रस्त है-- कितने सांसद और विधायक सक्रिय हैं मदद करने के लिए? हमें इस पर विचार करने और ध्यान देने की आवश्यकता है । अगर आज अपने जिम्मेदारियों को पूर्णता से निभाए होते तो महामारी हमारे देश में इतना विकराल रूप नहीं धारण किया होता।
आज सभी दलों ने जिस तरह से अपने सांसदों विधायकों को भेड़ बकरी की तरह हांकते हुए सरकार गिराने और बनाने की परंपरा बनाई है वह किसी प्रतिष्ठित लोकतंत्र के अनुरूप नहीं है। अधिकारों का दुरुपयोग कर नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। पुलिस इनकी खिदमतगाड़ी में नतमस्तक रहती है। न्याय प्रक्रिया भी इनकी मुट्ठी में कैद होती जा रही है। घोटाला ये करें ---जांच में इनका साथ देने वाला अधिकारी,पुलिस बर्खास्त हो जाती है पर इनका कुछ नहीं बिगड़ता।
आज हमारा देश कोरोना महामारी के चपेट में विश्व में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है और इस विकट स्थिति इन सांसदों और विधायकों का जो हास्यास्पद रवैया देखने को मिल रहा है उसको देखते हुए ये स्वार्थलोलुप विधायक और सांसद आदर और सहानुभूति के पात्र कतई नहीं है।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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