निःसंदेह रिश्तों में विश्वास सबसे बड़ी पूंजी होती है। विश्वास रुपी धागे में रिश्ते की सुंदर माला गुंथी रहती है। विश्वास, प्रेम और स्नेह से रिश्तों को मजबूती मिलती है। निजी स्वार्थ रिश्तों के लिए अहितकर साबित होता है। इंसानियत और विश्वास के माध्यम से हम मित्रता या पारिवारिक रिश्तों को बनाए रखते हैं। इसके खातिर एक दूसरे के निजी जीवन और निजत्व का सम्मान करना जरुरी होता है। सीमा से ज्यादा एक्सपेक्टेशन खटास पैदा करता है।
आज विश्वास के अभाव में रिश्तों की बलि चढ़ रही है। रिश्ते की मर्यादा का भी ध्यान रखें। रिश्तों का सुख और आनंद तभी है जब दोनों ही पक्ष अपनी निष्ठा और लगन से एक दूसरे के प्रति जिम्मेदारियों को निभायें।
यह अटल सत्य है कि प्रेम और विश्वास रुपी पहिये पर रिश्ते सुचारू रूप से चलते हैं। रिश्ते को बिखरने से बचाना है तो विश्वास कायम रखें। कर्म क्षेत्र में रिश्तो की मर्यादा न टूटे, विश्वास बनी रहे---सफल रिश्ते का यही मूल मंत्र है। सबसे बड़ी पूंजी होती है रिश्तों में विश्वास।
सुनीता रानी राठौर
ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
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